चलों कुछ नया सोचते हैं।
चलो कुछ नया सोचते हैं ।
जहाँ पुरी दुनिया कोरोना(कोविड़19) से लड़ रहा, चारों और बस हा हाकार मचा है, तो मन मे यही प्रश्न उठता है कि क्या दुनिया का अंत आ गया ? इसका उत्तर तो किसी के पास है नहीं, पर मैं यह जरूर कह सकती हूँ कि जहाँ हमने दुनिया मे कई जान खोई है , तो प्रकृति को नया जीवन दान दिया भी है। अब आप सोच रहे होंगे कैसे तो मै आपको बताना चाहूँगी कि जहाँ पशु पक्षी और जीव जंतु मानव जाति से डरे रहते थे जहाँ मनुष्यों के फायदे या स्वाद के लिए जानवरों को मार दिया जाता था वे आज स्वतंत्रता से सड़कों एवं समुंद्रों मे देखा जा रहा है।
जहाँ कुछ शहरों को कभी सोता नही देखा गया था, जानवरों को प्रदुषण के कारण या फिर सड़क हदसे मे मारे जाते थे जो शायद ही कभी आपने समाचार पत्रों या न्यूज चैनलों मे देखा होगा,आज वहीं जानवर बिना किसी डर के शहरों, सड़कों मे घुम रहे है । इस बात से तो यही साबित होता है कि मनुष्य आपने सफलता के चकाचौंध मै किस तरह प्रकृति और उसकी संरचना को किस तरह बर्बाद कर रहा था। मनुष्य यह भुल गया था कि जितनी धरती उसकी है उतनी जानवरों की भी है। आज जब मनुष्य आपने घरों मे लोक डाउन है उसी समय प्रकृति अपने आपको स्वस्थ करने मे व्यस्त है। जहाँ वर्षों से ओजोन परत महीन हो गई थी वही कम प्रदुषण के कारण वह परत धीरे-धीरे मोटी हो रही है । जहाँ फैक्टरी और मनुष्यों के कारण नदियाँ गंदी हो गई थी, वह मनुष्यों के ना होने के कारण साफ और निर्मल होता देखा जा रहा है ।
कुछ दिनों से कुछ ट्रेडिंग फोटो भी देखा जा रहा है जैसे बिना मनुष्यों के भारत विदेश जैसा दिखता है । और कई जगहों में जानवरों को सड़कों पर खुले आम देखा गया है जैसे की नोयडा मे निल गाय और उत्तराखंड में बारह सींघा। जहाँ दिल्ली मे वायु प्रदुषण दर 300 के पार आम तौर पर जाती थी, आज वह दर इतना कम है कि आसमान काला नहीं निला और साफ दिख रहा है ।
अब ये तो हो गई प्रकृति की बातें अब आपको बताना है कि आपको क्या मिला इस लोक डाउन से!
अगर आप लाक डाउन के पहले का समय याद करे तो आप को अपनी व्यस्त दिनचर्या ही दिखेगी, सायद आप पढाई के लिए कहीं दूर गये होंगे, सायद आप अपने 10 और 12 के बोडस की पढाई कर रहे होंगे । पर कोरोना वैश्विक बीमारी ने दस्तक दी है। तब से आपकी औफिस और कोलेज का अवकाश हो गया है । जहाँ आप के पास चंद घंटों का भी समय ना था! आज आप घर में बच्चों एवं माता पिता के साथ समय व्यतीत कर रहे हैं । अरे!अब तो सरकार ने आप को मनोरंजन के लिए रामायण एवं महाभारत भी दिखाना शुरू किया है। अब क्या दुख? अगर अभी भी आप को लगता है कि आप घर पे फंसे हैं तो कभी अपने बुढे माता पिता से पुछा है कि मै जब घर पर नहीं रहता था तो आप क्या करते होंगे? वे यही कहेंगे "तुम्हारा इंतजार!" हम पुरा परिवार तब ही एक जुट होते है जब कोई त्यौहार आता है, चलो एक बीमारी ने ही सही परिवार को एक साथ तो किया! जहाँ जिन बच्चों के माता पिता सप्ताह के 6 दिन अपने काम मै व्यस्त रहते थे बच्चों को नौकरों के भरोसे रहते थे आज वे अपने बच्चों के साथ खलते एवं पढाते हुऐ फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहें हैं । कुछ लोगों आपने कला का प्रदर्शन भी वीडियो या फोटो के माध्यम से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं । नवरात्रि के पर्व मे भी मंदिर ना जाकर व्रकसिप फरोम होम जैसे तकनीक लगा रहे हैं। कुछ लोगों अपना समय का सदुपयोग तरह तरह के किताब पढ कर रहे हैं । बस आप से एक ही हाथ जोड़ कर विनती है कृपया घरों से बाहर ना जाऐ परिवार और देश कि रक्षा करे। जिस तरह आजादी की लड़ाई में सब ने योगदान दिया था आज उसी प्रकार घरों में रह कर देश के सैनिक एव पुलिस और चिकित्सकों की सहायता करे और उनका सम्मान करे।
धन्यवाद ।
जहाँ कुछ शहरों को कभी सोता नही देखा गया था, जानवरों को प्रदुषण के कारण या फिर सड़क हदसे मे मारे जाते थे जो शायद ही कभी आपने समाचार पत्रों या न्यूज चैनलों मे देखा होगा,आज वहीं जानवर बिना किसी डर के शहरों, सड़कों मे घुम रहे है । इस बात से तो यही साबित होता है कि मनुष्य आपने सफलता के चकाचौंध मै किस तरह प्रकृति और उसकी संरचना को किस तरह बर्बाद कर रहा था। मनुष्य यह भुल गया था कि जितनी धरती उसकी है उतनी जानवरों की भी है। आज जब मनुष्य आपने घरों मे लोक डाउन है उसी समय प्रकृति अपने आपको स्वस्थ करने मे व्यस्त है। जहाँ वर्षों से ओजोन परत महीन हो गई थी वही कम प्रदुषण के कारण वह परत धीरे-धीरे मोटी हो रही है । जहाँ फैक्टरी और मनुष्यों के कारण नदियाँ गंदी हो गई थी, वह मनुष्यों के ना होने के कारण साफ और निर्मल होता देखा जा रहा है ।
कुछ दिनों से कुछ ट्रेडिंग फोटो भी देखा जा रहा है जैसे बिना मनुष्यों के भारत विदेश जैसा दिखता है । और कई जगहों में जानवरों को सड़कों पर खुले आम देखा गया है जैसे की नोयडा मे निल गाय और उत्तराखंड में बारह सींघा। जहाँ दिल्ली मे वायु प्रदुषण दर 300 के पार आम तौर पर जाती थी, आज वह दर इतना कम है कि आसमान काला नहीं निला और साफ दिख रहा है ।
अब ये तो हो गई प्रकृति की बातें अब आपको बताना है कि आपको क्या मिला इस लोक डाउन से!
अगर आप लाक डाउन के पहले का समय याद करे तो आप को अपनी व्यस्त दिनचर्या ही दिखेगी, सायद आप पढाई के लिए कहीं दूर गये होंगे, सायद आप अपने 10 और 12 के बोडस की पढाई कर रहे होंगे । पर कोरोना वैश्विक बीमारी ने दस्तक दी है। तब से आपकी औफिस और कोलेज का अवकाश हो गया है । जहाँ आप के पास चंद घंटों का भी समय ना था! आज आप घर में बच्चों एवं माता पिता के साथ समय व्यतीत कर रहे हैं । अरे!अब तो सरकार ने आप को मनोरंजन के लिए रामायण एवं महाभारत भी दिखाना शुरू किया है। अब क्या दुख? अगर अभी भी आप को लगता है कि आप घर पे फंसे हैं तो कभी अपने बुढे माता पिता से पुछा है कि मै जब घर पर नहीं रहता था तो आप क्या करते होंगे? वे यही कहेंगे "तुम्हारा इंतजार!" हम पुरा परिवार तब ही एक जुट होते है जब कोई त्यौहार आता है, चलो एक बीमारी ने ही सही परिवार को एक साथ तो किया! जहाँ जिन बच्चों के माता पिता सप्ताह के 6 दिन अपने काम मै व्यस्त रहते थे बच्चों को नौकरों के भरोसे रहते थे आज वे अपने बच्चों के साथ खलते एवं पढाते हुऐ फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहें हैं । कुछ लोगों आपने कला का प्रदर्शन भी वीडियो या फोटो के माध्यम से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं । नवरात्रि के पर्व मे भी मंदिर ना जाकर व्रकसिप फरोम होम जैसे तकनीक लगा रहे हैं। कुछ लोगों अपना समय का सदुपयोग तरह तरह के किताब पढ कर रहे हैं । बस आप से एक ही हाथ जोड़ कर विनती है कृपया घरों से बाहर ना जाऐ परिवार और देश कि रक्षा करे। जिस तरह आजादी की लड़ाई में सब ने योगदान दिया था आज उसी प्रकार घरों में रह कर देश के सैनिक एव पुलिस और चिकित्सकों की सहायता करे और उनका सम्मान करे।
धन्यवाद ।
सटीक विश्लेषण
ReplyDeleteधन्यवाद आयुष ❤
ReplyDeleteधन्यवाद आयुष ❤
ReplyDelete👌👌
ReplyDeleteThank you.
ReplyDeleteThank you.
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